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शनिवार, 5 जून 2021

पर्यावरण हमारे दैनिक जीवन से सीधा संबंध रखता है कृष्णानंद पांडे

 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पंडित कृष्णानंद पांडे ने कहा कि वृक्ष देव के समान है 
 इन्हे दूसरे के कल्याण लिए ही प्रकृति ने पैदा किया है ,मानव ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए मुर्गी के पेट फाड़ कर सम्पूर्ण अंडे निकालने की प्रवृत्ति के कारण बड़े पैमाने पर पेड़ों का सफाया कर दिया, नतीजा सबके सामने है दुनिया महामारी, प्राकृतिक आपदाओं, ग्लोबल वार्मिंग ,की समस्या से परेशान होना शुरू हो गई है। प्राकृतिक असंतुलन के संकेत को समझते हुए हम सभी को वृक्षों का लालन पालन करना होगा अन्यथा हमारी पीढ़ियां तमाम आपदाओं से निरंतर जूझते हुए बर्बाद हो जाएंगी , अगर हम सभी ने
 को उजाड़ना, बर्बाद करना नहीं छोड़ा तो और वृक्ष नहीं लगाए बचाए तो संपत्ति, बैंक बैलेंस, खजाना कुछ भी काम नहीं आएगा , वर्तमान के साथ पीढ़ियों को सुकून चाहिए तो पेड़ लगाइए । पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, परि और आवरण जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास या कह लें कि जो हमारे चारों ओर है। वहीं 'आवरण' का मतलब है जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। 
पर्यावरण जलवायु, स्वच्छता, प्रदूषण तथा वृक्ष का सभी को मिलाकर बनता है, और ये सभी चीजें यानी कि पर्यावरण हमारे दैनिक जीवन से सीधा संबंध रखता है और उसे प्रभावित करता है।
मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। पर्यावरण जैसे जलवायु प्रदूषण या वृक्षों का कम होना मानव शरीर और स्वास्थय पर सीधा असर डालता है। मानव की अच्छी-बूरी आदतें जैसे वृक्षों को सहेजना, जलवायु प्रदूषण रोकना, स्वच्छाता रखना भी पर्यावरण को प्रभावित करती है। मानव की बूरी आदतें जैसे पानी दूषित करना, बर्बाद करना, वृक्षों की अत्यधिक मात्रा में कटाई करना आदि पर्यावरण को बूरी तरह से प्रभावित करती है। जिसका नतीजा बाद में मानव को प्राकर्तिक आपदाओं का सामना करके भुगतना ही पड़ता है।

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