उप संपादक: ओमप्रकाश गुप्ता
जनपद आजमगढ़ के थाना निजामाबाद में उस समय हड़कंप मच गया जब रिश्वत लेने के आरोप में एक उपनिरीक्षक को खुद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आम जनता की सुरक्षा और न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाने वाले वर्दीधारी पर जब ₹15 हजार उत्कोच मांगने का आरोप लगा, तो लोगों में चर्चा तेज हो गई कि “अब फरियादी जाए तो जाए कहाँ?”
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वादी शहजाद अहमद ने क्षेत्राधिकारी सदर को शिकायत देकर आरोप लगाया कि मकान निर्माण कार्य शुरू कराने के एवज में चौकी फरिहा पर तैनात उपनिरीक्षक परमात्मा यादव द्वारा ₹15,000 की मांग की गई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए थाना निजामाबाद में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
जांच आगे बढ़ी तो रिश्वत के इस कथित खेल का पर्दाफाश हो गया। इसके बाद 09 मई 2026 को क्षेत्राधिकारी सदर के निर्देशन में चौकी प्रभारी फरिहा उ0नि0 चित्रांशु मिश्रा व टीम ने आरोपी उपनिरीक्षक परमात्मा यादव को थाना परिसर से गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय भेज दिया।
जनता के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि “जनता से वसूली का ठेका समझ बैठे थे दरोगा जी, लेकिन इस बार हिसाब-किताब खुद कानून ने कर दिया।”
यह कार्रवाई पुलिस विभाग के लिए भी एक संदेश मानी जा रही है कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। कानून का डंडा आखिरकार अपने ही सिस्टम के भ्रष्ट चेहरों पर भी चलना शुरू हो गया है।
संदेश साफ है — वर्दी सम्मान देती है, सौदेबाजी नहीं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें