आजमगढ़। कोरोना पॉजिटिव मिले मरीजों के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया जा रहा है, लेकिन जिले में यह कंटेनमेंट जोन पूरी तरह से हवा-हवाई ही साबित हो रहे हैं। सिर्फ रस्सी बांध कर बैरिकेड किया जा रहा है, जिसे पार कर लोग आसानी से आवाजाही कर रहे हैं। पुलिस व प्रशासन की यह लापरवाही कहीं लोगों को भारी न पड़ जाए।
जिले में लगातार कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कंटेनमेंट जोन भी बढ़ते जा रहे हैं। कंटेनमेंट जोन का मतलब यह होता है कि उस क्षेत्र के लोग न तो बाहर आ सकेंगे न ही बाहर का कोई व्यक्ति उस क्षेत्र में ही जा सकेंगे, लेकिन जिले में बनाए गए सभी कंटेनमेंट जोन में इन नियमों की जम कर धज्जियां उड़ रही है। शहर में स्थित कंटेनमेंट जोन में ही जब लोग सील करने के लिए बांधी गई रस्सी को पार कर आवाजाही कर रहे है तो ग्रामीणांचल के कंटेनमेंट जोन का क्या हाल होगा यह आसानी से समझा जा सकता है। शहर का सिधारी क्षेत्र भी शुक्रवार को एक पॉजिटिव मरीज मिल जाने के चलते कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया। पुलिस व प्रशासनिक अमले ने सिधारी तिराहा व हाइडिल चौराहा के पास पुलिस की बैरिकेड के साथ ही रस्सी आदि बांध कर सील कर दिया है लेकिन लोगों के आवाजाही पर कोई रोक नजर नहीं आई। कई लोग रस्सी से हुई बैरिकेडिंग को पार कर संक्रमित क्षेत्र में आवाजाही करते नजर आए। नियमत: इस कवायद पर रोक लगनी चाहिए लेकिन कंटेनमेंट जोन बनाए जाने के बाद भी ऐसा कुछ इस नए कंटेनमेंट क्षेत्र में होता नजर नहीं आया। लोग आवाजाही कर रहे थे और मौके पर मौजूद होमगार्ड के कुछ जवान व पुलिस कर्मी मूकदर्शक बने हुए थे।
पुरानी कोतवाली क्षेत्र में भी सामने आई थी लापरवाही
आजमगढ़। शहर के सीताराम-आसिफगंज क्षेत्र को पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद कंटेनमेंट जोन बनाया गया था। कंटेनमेंट जोन बनाए जाने के दूसरे दिन ही पॉजिटिव मरीज की मां ही घर से निकल कर पुरानी कोतवाली तिराहे पर पहुंच गई थी। वहीं कंटेनमेंट जोन में रहने वाले कई लोग बाहर आकर अपनी-अपनी दुकानें भी खोल रहे थे। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया तो अगले दिन से यहां कुछ कड़ाई जरूर नजर आई, लेकिन सिर्फ बैरिकेडिंग से होकर आवाजाही बंद है। पतली गलियों व एक दूसरे से छतों आदि से होकर लोग आज भी आवाजाही कर रहे हैं। जो कभी भी बड़े खतरे का कारण बन सकता है।
ग्रामीणांचल के कंटेनमेंट जोन में भी बुरा हाल
आजमगढ़। जब शहर के कंटेनमेंट जोन का यह हाल है तो ग्रामीणांचल में कैसा होगा यह आसानी से समझा जा सकता है। ग्रामीणांचल में भी कंटेनमेंट जोन के लोगों के आवाजाही पर कोई खास रोक नहीं लगी है। अपनी जरूरत के हिसाब से लोगों ने रास्ता निकाल रखा है। पुलिस व प्रशासनिक अमला एक रास्ते पर बैरिकेडिंग करता है तो ग्रामीण दूसरे रास्ते से निकल कर चक्रमण कर रहे है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पुलिस के लोग सुबह आठ से शाम पांच बजे तक बैरिकेडिंग पर रखवाली करते है और उनके जाने के बाद बैरिकेडिंग ही कई कंटेनमेंट जोन में गायब हो जा रही है। सुबह पुन: नए सिरे से बैरिकेडिंग की कवायद करायी जा रही है

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