बजट पर गरजे MLC गुड्डू जमाली: “आंकड़ों का मायाजाल, ज़मीन पर योजनाएं शून्य — बुनकर, किसान और कर्मचारी सब परेशान”
आज़मी संवाददाता
लखनऊ/आजमगढ़, 19 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के बजट सत्र में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सदस्य विधान परिषद शाह आलम (गुड्डू जमाली) ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार ने 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक का विशाल बजट पेश तो कर दिया, लेकिन उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है। उनके अनुसार यह बजट “केवल आंकड़ों का मायाजाल” है, जबकि ज़मीनी स्तर पर योजनाएं लगभग शून्य हैं।
सदन में बोलते हुए उन्होंने बताया कि कई विभाग आवंटित धनराशि खर्च ही नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी करीब 55% बजट ही खर्च हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पैसा जनता की भलाई के लिए उपयोग ही नहीं हो रहा, तो इतने बड़े बजट का औचित्य क्या है।
बुनकरों की समस्याओं पर विशेष रूप से बोलते हुए जमाली ने कहा कि हथकरघा विभाग का बजट भले बढ़ा दिया गया हो, लेकिन कच्चे माल के लिए कोई ठोस सहायता नहीं मिल रही। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में मुबारकपुर में करोड़ों रुपये से बना बुनकर विपणन केंद्र आज बेकार पड़ा है और बस डिपो व पशु आश्रय स्थल के रूप में उपयोग हो रहा है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मुद्दे पर उन्होंने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन 16,000 रुपये की बात की जाती है, लेकिन सरकार स्वयं 9,600 रुपये में कर्मचारियों से काम करा रही है।
स्थानीय समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आजमगढ़ की जर्जर सड़कों का विस्तार से उल्लेख किया। भदुली–निजामाबाद मार्ग, मिर्जापुर ब्लॉक से फूलपुर, माहुल होते हुए कलान चौक तक तथा जहानागंज ब्लॉक के शेरपुर बाजार से बोंगरिया बाजार तक खराब सड़कों के कारण किसानों को उपज ले जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश में बन रहे एक्सप्रेसवे पर भी उन्होंने चिंता जताई। आगरा एक्सप्रेसवे की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परियोजनाओं में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, जिसके कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने मांग की कि निर्माण कार्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
अंत में जमाली ने सरकार से अपील की कि केवल कागजों पर बजट आवंटित करने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाए कि धनराशि समय पर विभागों को मिले और उसका उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ जनहित में हो।

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